श्री राधामाधव देवस्थानम्

Shri Radha Madhav Devasthanam

🔴 विशेष सूचना
प्रिय भक्तजन, जय श्री राधा माधव! भाद्र पद के शुक्ल पक्ष चतुर्थी (14 सितम्बर ) दिन सोमवार को मंगल मूर्ति विघ्न हर्ता भगवान श्री महागणपति के प्राकटय का उत्सव मनाया जायेगा, इस अवसर पर शाम 5:00 बजे से भगवान गणपति जी का सहस्रार्चन पूजन होगा। आप सभी भगवान गणपति के दर्शन व महाप्रसाद को ग्रहण कर पुण्य का लाभ प्राप्त करें।

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                                श्री गौरी शंकर वट वृक्ष

मंदिर प्रांगण के गर्भगृह से वायव्य दिशा में श्री गौरी शंकर वट वृक्ष प्रतिष्ठित है। यह साक्षात भगवान शंकर का स्वरूप है। पुराणानुसार वटवृक्ष भगवान शंकर का जीवन्त प्रत्यक्ष वृक्षरूप माना जाता है।गौरी शंकट वृट वृक्ष की पूजा, दीपदान, जलदान से समस्त संकटो का नाश होता है एवं सुख सौभाग्य की वृद्धि होती है। विशेष रूप से वट सावित्रि व्रत में इसकी पूजा करने पर स्त्रियों एवं अविवाहित कन्याओं को सुख सौभाग्य एवं सन्तान सुख प्रदान करते हैं। विशेष रूप से अमावस्या तिथि में पूजा एवं दीपदान करने से आयु, आरोग्य, लक्ष्मी, एवं मनोकामना पूर्ण करते है तथा भगवान गौरी शंकर की कृपा प्राप्त होती है। वट(ज्येष्ठ मास अमावस्या) सावित्री व्रतों के दिन सुहागिन स्त्री बट गौरी शंकर वट वृक्ष की परिक्रमा करती है और चारों ओर सूत का कलावा बांधती है तो उस‌को पति सुख संतानसुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है। पुराणानुसार वट की जड़ों में ब्रह्मा, तने में विष्णु व डालियों व पत्तियों में भगवान शिव का निवास स्थान है एवं इस वृक्ष की लटकती हुई शिराओं में देवी सावित्री का निवास है।

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